देखिये गूगल का ऑफिस ,यहाँ मिलती है हर प्रकार की सुविधाए ..तस्वीर देखिये

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20 लाख स्क्वायर फुट इलाके में फैले गूगल के इस ऑफिस को पूरी तरह इको फ्रेंडली तरीके से बनाया गया है। कैंपस में जगह-जगह थीम पार्क बनाए गए हैं, जहां कर्मचारी तफरीह कर सकते हैं। गूगलप्लेक्स के भीतर एक सीमा के बाद कार और गाड़ियों की आवाजाही पर रोक है। कर्मचारी या तो पैदल चलते हैं या फिर इन खूबसूरत साइकिलों का इस्तेमाल करते हैं। इन साइकिलों में गूगल के खास रंग और उनकी झलक साफ देखी जा सकती है।
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गूगलप्लेक्स के भीतर का नजारा तो और भी रंगीन है। जिधर नजर जाती है उधर रंग-बिरंगे वर्क स्टेशन नजर आते हैं। हर तरफ गूगल के खास रंगों की छाप दिखाई देती है। लेकिन गूगल को सिर्फ काम करने के चलते दुनिया का बेहतरीन वर्क प्लेस नहीं माना जाता, बल्कि गूगल को ये खिताब इसलिए मिला है क्योंकि कंपनी अपने कर्मचारियों को काम करने के साथ साथ तमाम सुविधाएं देती हैं। कहा जाता है कि दिल का रास्ता पेट से होकर गुजरता है, यानी किसी का दिल जीतना है तो उसे लजीज खाना खिलाओ और गूगल में कर्मचारियों के खाने-पीने का पूरा इंतजाम है, वो भी एकदम मुफ्त।
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गूगल ने दफ्तर के भीतर बेहद रंग-बिरंगा माहौल बना रखा है। हर डिपार्टमेंट में अलग तरह के फर्नीचर, अलग तरह की सजावट नजर आती है। कर्मचारियों का कहना है कि जब उन्होंने नौकरी शुरू की तो उन्हें लगा कि इन चीजों से ध्यान बंटता है लेकिन बाद में एहसास हुआ कि असल में इनसे काम का तनाव कम होता है। आप अपने मन पंसद के अनुसार संगीन सुन सकते हैं, इनडोर गेम खेलना चाहते हैं तो गूगल प्लेक्स में आपके लिए टेबल टेनिस, बिलियर्ड्स, वीडियो गेम, और बॉउलिंग एले जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। अगर काम करके थक गए हैं तो मसाज भी करा सकते हैं।
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गूगल में काम करने का अलग ही अंदाज है। जमकर काम कीजिए, खूब मस्ती कीजिए... इस नारे की वजह से इस काम और मस्ती के इस कॉम्बिनेशन गूगल की दुनिया में गूगली कहा जाता है। यही गूगली कंपनी को काम करने के मामले में दुनिया की बेहतरीन कंपनी साबित करती हैं। यही वजह है कि कंपनी के कर्मचारी गूगल छोड़ना नहीं चाहते और जो गलती से छोड़ भी देते हैं उन्हें कोई और कंपनी रास नहीं आती।

बता दें कि दुनिया के 40 देशों में गूगल के 70 से ज्यादा दफ्तर हैं। कंपनी का कहना है कि हर दफ्तर का इंटीरियर और बनावट अलग और अपने आप में खास है। खास बात ये कि हर मुल्क के गूगल दफ्तर में वहां की संस्कृति और रीति रिवाजों की झलक दिखाई देती है।

खास बात ये है कि गूगल हेडक्वॉर्टर में काम करने वाले करीब 40 फीसदी कर्मचारी भारतीय या भारतीय मूल के हैं। कंपनी के सीईओ सुंदर पिचाई खुद भारतीय हैं और आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। ऐसे में सुंदर के सीईओ बनने के बाद गूगल में काम करने वाले भारतीय बेहद खुश हैं।
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