
जैसा कि आप लोग जानते है की भगवान विष्णु ने रावण का वध करने के लिए त्रेतायुग में मनुष्य रूप में श्री राम का अवतार लिया था उसी प्रकार द्वापरयुग में कंश का विनाश करने के लिए श्री कृष्णा का जन्म लिया था | यह संसार परम पिता ब्रम्हा द्वारा बनाया गया विधान है कि जो प्राणी इस संसार में आएगा उसकी मृत्यु जरुर होगी , इसी कारण त्रेतायुग में श्री राम जी को अपने शरीर का त्याग करना पड़ा था और द्वापर में भगवान कृष्णा को मृत्यु प्राप्त हुई थी |

आइये जानते है कि भगवान श्री कृष्णा के मृत्यु का कारण क्या था ?
आप लोग शायद ही जानते होंगे कि भगवान श्री कृष्णा को जरा नामक बहेलिये के तीर का निशाना लगने के कारण मृत्यु हुई थी , पर सवाल यह उठता है कि श्री कृष्णा तो भगवान थे तो उन्होंने भी श्री राम के समान अपने शरीर का त्याग क्यों नही किया ?
इस संसार में बिना कारण के कुछ भी होना संभव नहीं है इसलिए श्री कृष्णा के मृत्यु के पीछे भी एक कारण था | यह कहानी तब की है जब भगवान् श्री राम १४ वर्ष का वनवास पूरा कर रहे थे , इसी बीच लंका के रावण के साथ उनका बैर उत्पन्न हो जाता है जिसके कारण छलवश रावण सीता माता का हरण कर लेता है | सीता माता की तलाश करते - करते वन में श्री राम का सुग्रीव के साथ मुलाकात हो जाती है |

सुग्रीव अपने भाई बाली द्वारा किये जा रहे अन्याय की समस्या श्री राम को बताता है तभी श्री राम बाली को मारने और सुग्रीव को उनका राज्य लौटाने का वादा करते है | जब श्री राम बाली को मार देता है तभी बाली की पत्नी तारा ने श्री राम को श्राप दे देती है कि जिस प्रकार तूने मेरे पति को छिपकर मारा है उसी प्रकार मेरा पति अगले जन्म में तुझे छिपकर मारेगा |

कहा जाता है कि तारा के श्राप के कारण ही बाली अगले जन्म द्वापरयुग में किसी बहेलिये के घर जन्म लेता है जिसका नाम जरा पड़ा जरा रात को जंगलो में पशु-पक्षियों का शिकार किया करता था |कहा जाता है की भगवन श्री कृष्णा के पैर के तलुवे में एक चिन्ह था जो रात को चमकता था और यही चिन्ह उसके मृत्यु के कारण बनेगा ,ये बात सिर्फ भीम के पौत्र घटोत्कच के पुत्र बार्बरिक को पता चल गया था |

बताते है कि एक रात भगवान श्री कृष्णा नदी के तट पर किसी पेड़ पर बैठे हुए थे और उनके पैर के तलुवे की चिन्ह चमक रहा था , इसी बीच जरा शिकार करने निकल गया और श्री कृष्णा के पैर के चिन्ह जो चमक रहे थे उसे पक्षी समझ कर उस पर तीर चला दिया जिसे भगवन श्री कृष्णा ने इसे अपने मृत्यु का कारण मानकर प्राण त्याग दिए |
